शिवगुफा: यमुनोत्री मार्ग पर आस्था का नया पड़ाव
Shivgupha: A New Pilgrimage Stop on the Yamunotri Route
उत्तरकाशी। Shivgupha: A New Pilgrimage Stop on the Yamunotri Route, केदारनाथ की ध्यान गुफा के साथ ही अब यात्रियों में इस शिवगुफा का आकर्षण भी बढ़ रहा है। यमुनोत्री धाम के दर्शन के साथ ही तीर्थयात्री शिवगुफा के दर्शन को उमड़ रहे हैं।
यमुनोत्री हाईवे पर ब्रह्मखाल के निकट इस गुफा में स्थित प्रकटेश्वर पंच्चानन महादेव शिवलिंग के दर्शन व पूजन को तीर्थयात्रियों की लंबी कतार लग रही है। मान्यता है कि यमुनोत्री धाम की यात्रा कर शिवगुफा के दर्शन से तीर्थयात्रियों को आत्मिक शांति मिलती है। साथ ही उन्हें अन्य धामों की सफल यात्रा का आशीर्वाद भी मिलता है।
स्वयंभू पंचमुखी शिवलिंग
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर ब्रह्मखाल के निकट नगल महर गांव में शिवगुफा का पहली बार 23 जून 1998 को पता लगा था। बताया जाता है कि क्षेत्र में जब पेयजल की किल्लत हुई तो ग्रामीण पेयजल स्रोत की तलाश में निकले तो उन्हें यह पानी से भरी हुई गुफा मिली थी।
जब गुफा से पानी की निकासी की गई तो गुफा में दैदीप्यमान पाषण मूर्तियां मिली। इनमें स्वयंभू पंचमुखी शिवलिंग के साथ मां दुर्गा, गणेश, उनके वाहन मूषक, गरूड़, गुप्त केदार गंगा तथा गंगा वाहन मगरमच्छ, हनुमान का गदा तथा बालरूपी हनुमान की मूर्तिया नजर आईं।
तीर्थयात्रियों की अच्छी खासी भीड़
गुफा के प्राकट्य के बाद से ही बड़ी संख्या में तीर्थयात्री यमुनोत्री धाम के दर्शन करने के बाद इस गुफा में शिव को जलाभिषेक कर आशीर्वाद लेना नहीं भूलते हैं। वर्तमान में यहां एक ही रास्ता होने के चलते तीर्थयात्रियों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ रही है। दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों को चार से पांच घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।
शिवगुफा समिति के सदस्य राममूर्ति सिलवाल का कहना है कि यमुनोत्री दर्शन के बाद बड़ी संख्या में तीर्थयात्री शिवगुफा के दर्शन को पहुंचते हैं। कहा कि यहां पार्किंग की समस्या है, इस कारण यात्रियों को अपने वाहन सड़क किनारे ही खड़े करने पड़ते हैं।
वहीं, शिवगुफा तक पहुंचने का रास्ता संकरा होने से एक बार में 10 से 15 श्रद्धालु ही दर्शन कर पाते हैं। यदि शासन-प्रशासन पार्किंग के साथ आवाजाही के लिए उचित व्यवस्था करें तो यहां दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलने के साथ उनकी संख्या बढ़ेगी।
23 जून को मनाया जाएगा अवतरण दिवस
शिवगुफा का प्राकट्य 23 जून 1998 को हुआ था। इस कारण यहां शिवगुफा समिति की ओर प्रति वर्ष 23 जून को अवतरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवगुफा के दर्शन व पूजन को पहुंचते हैं। वहीं, शिवगुफा समिति की ओर से शिवगुफा में विशेष पूजा-अर्चना के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है।